Param earth movement

FAQs

ये राजा लंगूर का कटआउट चेयर पर रखा बिल्कुल असली लगता है, दूर से बंदर इसको देख कर डर के मारे नहीं आते, ये हमने कई महीनों तक आज़माया है।

आप जब इसको देखेंगे ना तो आप भी डर जाएंगे, चाहे आपको पता है कि ये सिर्फ एक कटआउट ही है।

और रहा सवाल एक रुपये का बंदरों की फीडिंग के लिए किसी NGO को भिजवाना, तो इस नेक काम को यूनिवर्स ज़रूर नोट करता है जी।

स्कूल्स, बड़ी फैक्ट्रीज़, बड़े ऑफिसेज़ में एक से ज़्यादा कटआउट्स लगवा सकते हैं चारों डायरेक्शन में।

अगर आपके इलाके के आस-पास के NGO की जानकारी आपको नहीं मिल पा रही तो एक रुपया बंदरों के खाने के नाम पर डेली राजा लंगूर के कटआउट को टच कर एक डिब्बे में डालते रहें फिलहाल, याद रखें ज़्यादा नहीं सिर्फ एक रुपये ही, आज से ही।

अगर मन मना करे या कल पर टाल दे तो बोल दो उसे — तू मुझे अपना काम करने दे, अब और चकमा मत दे, क्या मैं इंतज़ार करूँ कि जो दूसरों के साथ हो रहा है वो जब मेरे साथ या मेरी फैमिली के साथ होगा तब मैं एक्शन लूँगा? एक मामूली सा तो काम है।

ये राजा लंगूर का कटआउट चेयर पर रखा बिल्कुल असली लगता है, दूर से बंदर इसको देख कर डर के मारे नहीं आते, ये हमने कई महीनों तक आज़माया है।

आप जब इसको देखेंगे ना तो आप भी डर जाएंगे, चाहे आपको पता है कि ये सिर्फ एक कटआउट ही है।

और रहा सवाल एक रुपये का बंदरों की फीडिंग के लिए किसी NGO को भिजवाना, तो इस नेक काम को यूनिवर्स ज़रूर नोट करता है जी।

यहाँ शहरों में खाना देना ठीक नहीं है, गवर्नमेंट भी इसके बात के खिलाफ है, इन बंदरों को इनके ही जंगलों आदि में खाने का इंतज़ाम करना उचित है, क्योंकि यहाँ तो बर्बादी करते हैं ना, नासमझी की वजह से।

नहीं, निर्दयता अच्छी नहीं है, क्योंकि हम मनुष्यों और बंदरों दोनों में एक ही परमात्मा वास करता है....चाहे शरीर अलग है, ये कमज़ोर बेचारे नासमझ हैं, सिर्फ भूख ही इनसे शरारतें कराती है।

ये तो सेवा है, अपने परिवार की भी और अपने आस-पास के समाज की भी। सब सुरक्षित रहेंगे और बंदरों को उनके घर खाने भिजवाने की 1 रुपये डेली की सेवा भी साथ-साथ। और इसमें किरायेदार वाली तो कोई बात ही नहीं, तो जब आप शिफ्ट करें तो राजा लंगूर का कटआउट अपने नए घर में ले जाइएगा।

500-700 मतलब, 15,000-20,000 महीने का कमा रहे हैं। तो हज़ार रुपया सबकी सुरक्षा के लिए, एक बार इन्वेस्ट करके सबको सुरक्षित कर सकते हैं।..... 1000 रुपये कोई बड़ी बात नहीं, कहीं से अरेंज करके 100-100 कर के लौटाए जा सकते हैं, राजा लंगूर का कटआउट लगा कर सेवा कर रहे हैं आप, अपने परिवार की भी, समाज की भी और उसके बाद बंदरों के लिए तो 1 रुपये रोज़ ज़रूर भिजवाना, जो लोग समर्थ हैं, वो अगर चाहें तो फाइनेंशियली वीक परिवारों को राजा लंगूर का कटआउट गिफ्ट कर सकते हैं।

टेरेस मतलब छत, हाँ, तो अगर आप चाहें तो टेरेस पर राजा लंगूर के कटआउट को लगवाना है तो लगवा सकते हैं, सूटेबल जगह पर अच्छे से, इज़्ज़त से।

 

और रोज़ वहाँ साफ नहीं किय जा  सके तो जैसे कन्वीनिएंट हो कर सकते हैं, जैसे वीकली 1 मिनट की सफाई किसी सर्वेंट द्वारा।

पर कभी-कभी भाव से देख ज़रूर लें..... कहीं बेक़दरी तो नहीं हो रही।

1 रुपये की सेवा बंदरों के खाने के लिए तो डेली भेजते रहें अपने नज़दीकी NGO को बिना भूले, क्योंकि खाना तो रोज़ चाहिए होता है। क्योंकि भूख तो रोज़ लगती है बंदरों को जैसे हमें लगती है।

फिलहाल आपको प्रचार की ज़्यादा ज़रूरत नहीं है।

घर, ऑफिस, दुकान में लगा राजा लंगूर का ये कटआउट ही बता देगा कि आप अपनी सुरक्षा और बेचारे बंदरों के लिए डेली 1 रुपये की सेवा भेज रहे हैं।

धीरे-धीरे आप देखेंगे कि आपको सेवा में मज़ा आने लगेगा, और आप अगले मिशन्स में भी भागीदार बनेंगे।

परमअर्थ मूवमेंट का आपसे अनुरोध है कि मार्केट में हम से मिलते-जुलते नकली/सस्ते राजा लंगूर के कटआउट न लें। बुनियाद में ही नकली सीमेंट डाल दिया तो आगे बिल्डिंग का क्या हाल होगा,दूसरा, यह अच्छा क्वालिटी का है, जो धूप या बारिश से महीनों तक खराब नहीं होता। तो आप परमअर्थ मूवमेंट का राजा लंगूर का असली कटआउट खरीदें और इस मिशन को कामयाब बनाने में अपनी सच्ची  भूमिका निभाएं।

राजा लंगूर का ये कटआउट दूर से चेयर पर बैठा बिल्कुल असली लगता है, आप भी डर जाएंगे जब आप देखेंगे, जबकि आपको पता ही है कि ये सिर्फ एक कटआउट है, ये हमने महीनों तक आज़माया है।

देखिए, राजा लंगूर का ये कटआउट आप अपना समझ के घर में रखें जी, जैसे आपके घर का कोई मेंबर कहीं दूसरी जगह रहता हो तो उसकी फोटो या वीडियो कॉल के समय आप भाव से बात करते हैं ना, इस कटआउट को भी अपना ही समझिए जी, और साफ रखना तो अच्छा ही है जी।

फैमिली या फ्रेंड्स के साथ मूवी देखने जाते हो या रेस्टोरेंट या फिर स्कूटर/कार की सर्विस या बीमारी में, 1000 रुपये का पता ही नहीं लगता, और ये 1000 रुपये तो एक नेक काम में इन्वेस्ट कर रहे हो...

लंबे समय तक फैमिली और समाज की सुरक्षा के लिए, और जो ये भी याद दिलाता रहेगा कि 1 रुपये रोज़ बेचारे भूखे बंदरों के लिए भी भेजना है।

जी, आप ठीक कह रहे हैं, लेकिन इसमें एक शब्द कम होना चाहिए...

"सिर्फ"।

परमअर्थ मूवमेंट स्वार्थ और परमार्थ दोनों को सुझाव देता है, जो कि हर बिज़नेस का लक्ष्य होना ही चाहिए, या नहीं?

 

CLAP CLAP...... बेटा जी, आपको तो ज़रूर आराम से डिटेल में बताएंगे, जिस से आपकी क्रिएटिविटी बढ़ेगी और आप समाज से जुड़ेंगे।

पहला: आपके पिनकोड के जितने भी स्कूल हैं, मान लो 10 या 20, इन सबके हेड बॉय/हेड गर्ल का एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाइए।

फिर अपने स्कूल के गेट्स पर राजा लंगूर के कटआउट के साथ ही अपना नाम और फोन नंबर का नोटिस लगवा दो, साथ ही लिखा हो कि मंकीज़ की फीडिंग के लिए जो भी 1 रुपये भेजना चाहे, हमारे फोन नंबर पर भेज कर सकता है।

ये सब अमाउंट कलेक्ट होता जाएगा। 1-1 रुपये की जानकारी पूरे ग्रुप को होती जाएगी।

टाइम टू टाइम जैसे वीकली, ये अमाउंट NGO के अकाउंट में ट्रांसफर कर सकते हो।

दूसरा: आप सब स्टूडेंट्स को एंकरेज करो, 10-10 या 20-20 रुपये पर हेड कलेक्ट करा कर परम अर्थ मूवमेंट से राजा लंगूर के कटआउट मंगा कर अपने-अपने स्कूल को गिफ्ट करो। ये कटआउट सभी डायरेक्शन में लगेंगे क्योंकि घर के लिए एक कटआउट काफी है, लेकिन स्कूल बड़े होते हैं, वहाँ चारों डायरेक्शन में कटआउट लगाने से सुरक्षा बढ़ेगी।

इस सब के लिए आपकी कीमती पढ़ाई का वक्त खराब नहीं होगा..... सिर्फ 5 मिनट ही डेली फोन पर ही सेवा होगी।

अमीर-गरीब समान रूप से और रोज़-रोज़ सबका साथ लेकर ये मिशन आहिस्ता-आहिस्ता पूरा होगा। जल्दबाज़ी से कभी ज़्यादा और कभी बिल्कुल नहीं... ऐसे नहीं।

रोज़-रोज़ 1-1 रुपये। काम बनेगा, देखना।

जी, आपकी बात बिल्कुल ठीक है... आपने जो अपना कीमती वक्त निकाल कर ये वीडियो देखी और आपको सॉल्यूशन पसंद आया.. उसके लिए आपका धन्यवाद जी...

ये करुणा का भाव जो सब में पहले से ही है... उसी ही को जगाने.. याद दिलाने के लिए ये हमारा प्रयास है।

हम अपूर्ण हैं... पूर्ण तो वह परमात्मा ही है... हम मनुष्यों की बुद्धि, हमारी समझ की सीमा होती है।

फिर भी जो अधिक से अधिक सही लगा... किया।

गलतियों के लिए क्षमा प्रार्थी हैं।

अपनी छोटी सामर्थ्य के हिसाब से ही जब कोई सेवा की शुरुआत कर देता है.. तो वो प्रभु उसकी सामर्थ्य भी बढ़ाते रहते हैं.... ऐसे हज़ारों उदाहरण हैं... इस संसार में।

इस लिए... "स्वार्थ भी परमार्थ भी"

थैंक यू जी। ये किसी एक का काम ही नहीं। हम सब मिलकर ही इस मिशन को कामयाब बनाएंगे जी... और आगे के मिशन्स को भी... धन्यवाद जी।

मैं अपना एक्सपीरियंस बताता हूँ...

... कि रिस्पेक्ट का मुझे कैसे पता लगा... हमारे घर कई सालों से रेगुलर बंदर आते... हम बाहर कपड़े नहीं सूखा सकते थे.. अंदर कमरों में पंखा चला के कपड़े सूखते, बालकनी और टेरेस पे सारे प्लांट्स खराब और तोड़-फोड़ देते बार-बार.... अगर दरवाज़ा खुला रह गया तो फ्रिज खोल के सब चीज़ें बर्बाद कर देते।

बालकनी में जब राजा लंगूर का कटआउट लगा.. तो बंदरों का आना कम होता गया...

पड़ोस में आते... मगर रेगुलर हमारे घर कम हो गया.... फिर मंथ में एक बार.. फिर बिल्कुल बंद।

कभी-कभी पड़ोस की छत से दूर से राजा लंगूर को देखते रहते काफी देर... बिना डरे।

कभी कोई बंदर का बच्चा अचानक आ जाए खेलते-खेलते तो बड़ा बंदर उसे आराम से ले जाता... बिना नुकसान किए।

एक दिन बहुत सर्दी थी। 2 बंदर आके राजा लंगूर की चेयर के पास वाली चेयर पर एक कपड़ा पड़ा था.... उस पर बैठ गए....

हमने सोचा .... ये तो फिर आ गए बर्बादी करने.... हमने स्पीकर्स से पटाखों की.... लंगूर की साउंड सुनाई.... वो नहीं गए....

हमें दया भी आ रही थी, खाना भी देना चाहते थे.... मगर नहीं दिया... हमें परमानेंट सॉल्यूशन ढूंढना था।

और एक-आध घंटे बाद हमने देखा.... वो आराम से जा चुके थे। शायद एक बंदर ठंड से कुछ बीमार या कमज़ोर हो गया था... यहाँ रेस्ट मिला.... और वो आराम से चले गए।

ये कहानी है.... डर और रिस्पेक्ट की... जिसने आगे चलकर हमें प्रेरणा दी.... और..

परमअर्थ मूवमेंट का जन्म हुआ।

 ध्यान से अपने मन में सुनो... ईश्वर कह रहे हैं...

"करुणा" और "प्रेम".....

जो कि ईश्वरीय गुण हैं...

हे मानव, वो पहले ही आपके अंदर मौजूद हैं.... आप अच्छे हो... बहुत अच्छे हो... आपसे दूसरों का दुख नहीं देखा जाता.... आपके अंदर मदद करने की तीव्र इच्छा होती है... लेकिन दब जाती है...

फिर-फिर दब जाती है.... परिस्थितियों के कारण..... और आप सोचते हो कि आप.... पत्थर दिल हो... जबकि ऐसा नहीं है....

आप उठो... याद करो अपने उन ईश्वरीय भावों को.... करुणा... प्रेम... उन भावों को जगाओ... थोड़ा-थोड़ा रोज़-रोज़ प्रैक्टिस करो... मतलब कि... जब भी किसी व्यक्ति, या समाज, या किसी और जीव, या प्रकृति की जड़ या चेतन किसी को परमात्मा आपके आगे भेजे.... फौरन आपके अंदर 1 प्रतिशत भी दया-करुणा का भाव जगे तो उस भाव को व्यर्थ मत जाने दो.... उसको जितना हो सके क्रियान्वित रूप दो.... मदद करो... धीरे-धीरे... अगली बार प्रेम-करुणा 2 प्रतिशत.... फिर 3 प्रतिशत.... अगली बार 4 प्रतिशत.... ऐसे प्रेम और करुणा यानी परमात्मा रूपी सागर की बूंद बढ़ती जाएगी।

ईश्वर तुम्हारे अंदर उतर आएंगे.... तुम्हारी परिस्थितियां अनुकूल हो जाएंगी..

...............

 

परमअर्थ मूवमेंट का उद्देश्य भी यही है...

हम मनुष्यों में परमात्मा रूपी सागर की एक बूंद है..."करुणा और प्रेम"... उसको जगाना और बढ़ाना।

बंदरों की समस्या तो एक छोटी बात है... वो तो हल होगी ही..... साथ ही ज़िंदगी स्फूर्ति और आनंद से भर जाएगी।

जनता के सहयोग के बिना अकेले सरकार या NGOs कैसे ये सब मिशन पूरे करें... इसी लिए अधूरे रह जाते हैं... 1 रुपये के मामूली सहयोग से किसी का कुछ घट नहीं जाता बल्कि आपके इस एक रुपये के सहयोग से विराट मिशन पूरे कर सकेंगी सरकार और NGOs.... प्लीज़ इनका सहयोग अवश्य करें जी