मैं अपना एक्सपीरियंस बताता हूँ
हमारे घर कई सालों से रेगुलर बंदर आते… हम बाहर कपड़े नहीं सूखा सकते थे.. अंदर कमरों में पंखा चला के कपड़े सूखते, बालकनी और टेरेस पे सारे प्लांट्स खराब और तोड़-फोड़ देते बार-बार…. अगर दरवाज़ा खुला रह गया तो फ्रिज खोल के सब चीज़ें बर्बाद कर देते।
बालकनी में जब राजा लंगूर का कटआउट लगा.. तो बंदरों का आना कम होता गया…
पड़ोस में आते… मगर रेगुलर हमारे घर कम हो गया…. फिर मंथ में एक बार.. फिर बिल्कुल बंद।
कभी-कभी पड़ोस की छत से दूर से राजा लंगूर को देखते रहते काफी देर… बिना डरे।
कभी कोई बंदर का बच्चा अचानक आ जाए खेलते-खेलते तो बड़ा बंदर उसे आराम से ले जाता… बिना नुकसान किए।
एक दिन बहुत सर्दी थी। 2 बंदर आके राजा लंगूर की चेयर के पास वाली चेयर पर एक कपड़ा पड़ा था…. उस पर बैठ गए….
हमने सोचा …. ये तो फिर आ गए बर्बादी करने…. हमने स्पीकर्स से पटाखों की…. लंगूर की साउंड सुनाई…. वो नहीं गए….
हमें दया भी आ रही थी, खाना भी देना चाहते थे…. मगर नहीं दिया… हमें परमानेंट सॉल्यूशन ढूंढना था।
और एक-आध घंटे बाद हमने देखा…. वो आराम से जा चुके थे। शायद एक बंदर ठंड से कुछ बीमार या कमज़ोर हो गया था… यहाँ रेस्ट मिला…. और वो आराम से चले गए।
ये कहानी है…. डर और रिस्पेक्ट की… जिसने आगे चलकर हमें प्रेरणा दी…. और..
परमअर्थ मूवमेंट का जन्म हुआ।